A straw.jpg

एक तिनका हम

हमारा क्या वज़न


हम पराश्रित वायु के

चंद पल हैं आयु के

एक पल अपना ज़मीं है

दूसरा पल है गगन


ईंट हम इस नीड़ के

ईंट हम उस नीड़ के

पंछियों से हर दफ़ा

होता गया अपना चयन


ग़ौर से देखो हमें

रँग वही हम पर जमे

वो हमीं थे, जब हरे थे

बीज का हम कवच बन


हम हुए जो बेदख़ल

घाव से छप्पर विकल

आज भी बरसात में

टपकें हमारे ये नयन


साध थी उठ राह से

हम जुड़ें परिवार से

आज रोटी सेंक श्रम की

ज़िंदगी कर दी हवन

बाह्य सूत्र

Community content is available under CC-BY-SA unless otherwise noted.