Abeer Gulal.jpg

हर कड़ुवाहट पर

जीवन की

आज अबीर लगा दे

फगुआ-ढोल बजा दे


तेज हुआ रवि

भागी ठिठुरन

शीत-उष्ण-सी

ऋतु की चितवन


अकड़ गई जो

टहनी मन की

उसको तनिक लचा दे


खोलें गाँठ

लगी जो छल की

रिहा करें हम

छवि निश्छल की


जलन मची अनबन की

उस पर

शीतल बैन लगा दे


साल नया है

पहला दिन है

मधुवन-गन्ध

अभी कमसिन है


सुनो, पपीहे

ऐसे में तू

कोयल के सुर गा दे

बाह्य सूत्र

Community content is available under CC-BY-SA unless otherwise noted.